“हमारे धर्मग्रन्थ” पर 2 विचार

  1. परमादरणीय मान्यवर
    आपके द्वारा प्रदत्त धर्मग्रन्थ सूची में ब्राह्म्ण व आरण्यकों की सूची अलग करें ऐसा मेरा सुझाव है। तथा आरण्यकों में शांखायन आरण्यक को जोड़ें यह आरण्यक ऋग्वेदीय आरण्यक है।
    तथा ब्राह्मणों की सूची में षड्विंश ब्राह्मण, ताण्ड्य महाब्राह्मण को जोड़ें।
    इसी प्रकार सूत्र ग्रन्थों में एक शीर्षक शुल्व सूत्र का है जिसके अन्तर्गत आपस्तम्ब शुल्व सूत्र, बौधायन, कात्यायन, मैत्रायणी, हिरण्यकेशी तथा मानव शुल्व सूत्र।
    शुल्व सूत्रों में यज्ञ की वेदी तथा यज्ञमण्डप आदि का विषय हमें प्राप्त होता है। पाइथोगोरस प्रमेय वास्तव में बौधायन शुल्व सूत्र से ही ली गई है। जिसके अन्तर्गत समचोरस वेदी की माप कर्ण विकर्ण आदि के सन्दर्भ में चर्चा हमें प्राप्त होती है।
    शेष अन्य की सूची एवं जानकारियाँ आगे देता रहूँगा।
    आभार
    डॉ. दिलीप कुमार नाथाणी (डी.लिट्.)

    1. आदरणीय नाथाणीजी !
      बहुमूल्य संशोधनोँ के परामर्श हेतु कृतज्ञ हूँ। यतः संशोधन एक जटिल प्रक्रिया है, अतः जब भी संशोधन करूंगा ये संशोधन अवश्य कर लूंगा। तब तक अन्य दर्शकोँ के लाभार्थ आपकी टिप्पणी ही यथावत् उद्धृत कर रहा हूँ। पुनः आभार सहित –
      त्रिलोक र. राठी

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